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चुनावी खेल में फिल्मी कलाकारों से विकास कार्यों का मिट जाएगा नामो निशान

खेत खलिहान धूल मिट्टी में खड़े होने की नहीं होती विसात जनमानस की पीड़ा और क्षेत्रीय समस्याओं से नहीं रहा रिश्ता

 

गोरखपुर। चुनावी हलचल में दलों से टिकट पाकर फिल्मी दुनिया में अपने कलाओं से महारथ हासिल करने वालों को गांव देहात के माटी धूल खेत खलिहान सड़क पुलिया के बाबत राजनीतिक दिशा में कभी रुचि न लेने वाले को जनप्रतिनिधि बनाने में जनमानस के क्षेत्रों का क्या हर्ष होगा जिसे भारत की जनता देखती चली आ रही है। ऐसे में क्षेत्रीय जनमानस जो अपनी पूरी उम्र व समय गांव गांव के लोगों में उनके पीड़ा व समस्या के बीच बिताते चले आ रहे हैं तो उनके हक को मारकर अपात्र राजनीति मानव को चुनावी खेल में लाना कितना सुखमय व दर्दमय होगा मालूम हो कि जिसने मुंबई से बढ़कर देश व विदेश में अपने कलाओं के बल पर नाम रोशन किया हो उसे गांव खेत खलिहान धूल मिट्टी व जनता की पीड़ा के बाबत क्या पता है। इतना ही नहीं जो अपना पूरा समय क्षेत्र की जनता के बीच 5 साल कैसे बिता पायेगा जिस पर सच कहना अतिश्योक्ति होगी। वैसे तो भारत कि जनमानस चुनावी दंगल में अपना सब कुछ है बर्बाद कर बाहरी व्यक्तियों की हवा हवाई देख चुन लेती है और फिर अपना व क्षेत्र के विकास व्यवस्थाओं को पीछे छोड़ देती है। अब तो चुनावी दंगल में फिल्मी कलाकारों को पार्टियां उतारकर चर्चाओं से भरा माहौल को भुनाने तक का मतलब रखती हैं फिलहाल जनता को चुनावी दंगल के बाद हमेशा आंसू बहाने पर मजबूर रहना पड़ता है वैसे तो चुनावी ढोलक की आवाज गूंजना शुरू हो गयी है।

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