उत्तर प्रदेशगोरखपुर

सदर सांसद के संसदीय क्षेत्र का हाल

जनता 12 माह में भी नहीं देख पायी अपने सदर सांसद को

 

– नेता जी अपने आवास पर ही लगाते रहे दरबार और करते रहे कार्य

गोरखपुर। वर्ष 2018 में हुए लोकसभा उपचुनाव में निषाद पार्टी के नाम पर राजनीति का बिगुल बजाने वाले डॉ संजय निषाद ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से तालमेल बनाकर अपने इंजीनियर पुत्र प्रवीण निषाद को सपा से टिकट दिला कर उपचुनाव में विजय हासिल कर लिए। चू की सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो से उपचुनाव में समर्थन प्राप्त कर जीत का डंका बजवा दिया। लेकिन जीतने के बाद सदर सांसद श्री निषाद अपने कार्यकाल के 12 माह बिता दिए लेकिन विधान सभाओं के गांव की जनता के बीच अपनी पहचान नहीं दिखा सके। जनता इन्हें जो मूल मतदाता हैं वो पहचानते नहीं हैं इनके शक्ल को देखने की लालसा धरी की धरी रह गई सांसद जी अपने पिता के निर्देशकक्रम में घर पर ही बाजार लगाते रहे। मालूम हो कि यदि समाजवादी पार्टी के बैनर तले राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इन्हें मैदान में उतारते हैं तो गांव की जनता फिर इन पर कैसे भरोसा करेगी कि नेताजी समय रहते गांव की जनता को दर्शनार्थ अवश्य दिखेंगे जो कि 12 माह के कार्यकाल को देखा जाए तो विकास का दर व्याधि भरा रहा गांवो की सड़कों को कोई पूछने तक नहीं पहुंचा यदि कोई पहुंचा तो उसे आश्वासन का झोला पकड़ा दिया गया और अंत तक कार्य भी नहीं हुआ। अब तो गांव की जनता यह कहना शुरू कर दी है कि जनता के बीच राजनीति का पहाड़ा नहीं सीख पाए। फिलहाल सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं प्रदेश का बागडोर संभाल चुके हैं। वह स्वयं सोच समझकर बेहतर कदम रखेंगे।

 

-सपाई भी इन्हें कठपुतली समझते रहे…

गोरखपुर। सदर सांसद होने के बाद भी यहां के जिला व नगर समेत अन्य विगो के नेता इन्हें कठपुतली के तौर पर स्थान देते रहें। क्यों कि सदर सांसद इंजीनियर प्रवीण कुमार सपाइयों के तालमेल से दूर रहते हुए अपने पिता की पार्टी निषाद पार्टी के लिए दम भरते रहे हैं। वैसे तो गठबंधन की लालसा से सपाइयों को बसपा की ताकत मिली है जो उसी बसपा की ताकत को भुनाने में महारथ हासिल करेंगे वैसे तो जिले में सपा की गिरती साख जो स्थानीय पदाधिकारियों के नाते आपसी तलख से भारी नुकसान दिख रहा है। चू कि स्थानीय नेताओं के चलते कुछ यादव व ब्राम्हण तथा अल्पसंख्यक समाज गुरेजी निगाह लगाये बैठा है।

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