कुशीनगरगोरखपुर

अमेरिका में छा गये कवि ‘सावन’

कुशीनगर जनपद का नाम किया रोशन।

भगवन्त यादव संबाददाता

कुशीनगरlअमेरिका से प्रकाशित होने वाले प्रतिष्ठित हिंदी अख़ बार ‘ हम हिंदुस्तानी ‘ में युवा कवि श्री सुनील चौरसिया ‘सावन’ की मर्मस्पर्शी कविता ‘हाय रे कुमुदिनी ‘ प्रकाशित हुई है , जिससे परिवार में , समाज में और साहित्यकारों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है | २७ वर्षीय कवि ‘सावन’ ने अबतक ६०० से अधिक कविताएँ लिखी हैं | आपने श्रीमद्भागवत् गीता के द्वितीय अध्याय ‘सांख्ययोग’ के ७२ श्लोकों का काव्यात्मक अनुवाद भी किया है | देश के विभिन्न समाचार -पत्रों एवं पत्रिकाओं में आपकी सैकड़ों कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं | ‘आओ , पढाई कर लो बेटी ‘ , ‘ पहाड़’ , ‘जान से प्यारा वतन हिन्दुस्तान’, ‘निर्वाण’ , ‘चिंतन’ , ‘मिट्टी के दीये’ , ‘बात कहें सांचे सुनील चौरसिया’ , ‘मैं कौन हूँ’, ‘महंगा वर’ , ‘प्यार होना चाहिए’ ,’मेरी प्यारी माँ’ आदि आपकी लोकप्रिय कविताएँ हैं |

केन्द्रीय विद्यालय टेंगा वैली, पश्चिम कमेंग , अरुणाचल प्रदेश में बतौर स्नातकोत्तर शिक्षक हिंदी एवं एसोसिएट एनसीसी अधिकारी पद पर सेवा प्रदान कर रहे श्री सुनील चौरसिया ‘सावन’ की जन्मतिथि- 5 अगस्त 1993 और जन्म स्थान-ग्राम- अमवा बाजार, पोस्ट – रामकोला, जिला -कुशीनगर, उत्तर प्रदेश है ।माता का नाम श्रीमती उर्मिला देवी एवं पिता का नाम श्री रामकेवल चौरसिया है | जनता इंटर कालेज रामकोला से इंटर पास कर आपने बुद्ध स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर से बी.ए. और एम.ए.(हिन्दी) की उपाधियां प्राप्त की |

रजत एवं स्वर्ण पदक विजेता कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ ने धर्म, साहित्य एवं संगीत की पावन नगरी वाराणसी के श्री हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय से बीएड भी किया हुआ है। इसके अलावा नेट , डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन,एनसीसी, स्काउट गाइड, एनएसएस आदि भी आपके नाम है। आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन, लेखन एवं मंचीय काव्यपाठ है तो सामाजिक क्षेत्र में नर सेवा नारायण सेवा की दृष्टि से यथा सामर्थ्य समाजसेवा में सक्रिय हैं। विधाएं – कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, संस्मरण, डायरी, निबन्ध आदि हैं ।

आपकी कुछ लघुकथाएँ जैसे – ‘तलाक-तलाक-तलाक’ , ‘कायर करते आत्महत्या’ आदि काफी चर्चित रहीं |

अन्य उपलब्धियों में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बैनर तले मॉरीशस, इंग्लैंड ,दुबई, ओमान, फिजी , ट्रिनिडाड , आस्ट्रेलिया आदि सोलह देशों के साहित्यकारों एवं सम्माननीय विदूषियों-विद्वानों के साथ काव्यपाठ एवं विचार विमर्श शामिल है। मासिक पत्रिका ‘भोजपुरी संगम ‘ के उप-सम्पादक भी हैं। लेखन का उद्देश्य ज्ञान की गंगा बहाते हुए मुरझाए हुए जीवन को कुसुम-सा खिलाना, सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार कर सकारात्मक सोच को पल्लवित-पुष्पित करना, स्वान्त:सुखाय एवं लोक कल्याण करना है। श्री चौरसिया की रचनाएँ कई समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

कवि ‘सावन’ बाल्यावस्था से ही कविताएँ लिखते हैं | २०१० में आपका पहला काव्य संग्रह् “स्वर्ग” नाम से प्रकाशित हुआ था जिसकी हजारों प्रतियाँ हाथों- हाथ बिक गईं |

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