गोरखपुर: लाक डाउन में जहां छोटे-छोटे गरीब मजदूर  रिक्शा चालकों तथा उनके परिवारों में खाने की समस्या उत्पन्न हो गई है वहीं एक तरफ दैनिक कामाने खाने वालों के परिवार काफी परेशान है उसी परेशानी हाल को देख कुछ ऐसे भी बहादुर हैं जो टॉफी चॉकलेट देकर अपने को चर्चा में बने रहने एवं बेहतर समाजसेवी बनकर गरीबों की दर्द को देखने के महारथी बनते हैं  लेकिन ऐसे लोग आखिर में भोजन के लिए राशन सामग्री क्यों नहीं देकर भूखे परिवारों का पेट भरने में कोशिश कर रहे हैं बताने की भोजन सामग्री देकर भूखे परिवारों क पेट भरे लेकिन लोग  टॉफी देकर चर्चे में आएं फिलहाल देखा जाए तो कुछ ऐसे बहादुर शहर में खूब चर्चा में है जो असली व्यवस्था को पटल तक ना करने की बहादुरी भी रखते हैं तथा सुखी बागों में पानी चलाने से हरा भरा रखने का जज्बा भी दिखा रहे हैं यदि ऐसे में उन्हें गरीबों का पेट ही भरना है इसमें अपने को महत्वपूर्ण बहादुर साबित होना है तो वास्तव में अपने निजी व्यवस्था से कटौती कर गरीबों तक पेट भराई के लिए राशन देने की व्यवस्था करते तो चारों तरफ लोगों को हकीकत का आशीर्वाद मिलता  और कोई उंगली नहीं उठा पाता फिलहाल गरीबों के साथ टॉफी चॉकलेट देकर उनका मजाक उड़ाना बुद्धिमानी नहीं है यदि ऐसे लोगों को समाज सेवा या गरीबों का पेट ही भरना है तो ऐसे परिवारों को चिन्हित कर उनके घर राशन सामग्री भिजवा दें तो ईश्वर उन्हें और तरक्की देगा