जलसा-ए-गौसुलवरा व महफिल-ए-गौसुलवरा का 6वां दिन

गोरखपुर। रविवार को अक्सा जामा मस्जिद शाहिदाबाद हुमायूंपुर उत्तरी के पास जलसा-ए-गौसुलवरा हुआ। मुख्य वक्ता नायब काजी मुफ्ती मो. अज़हर शम्सी ने कहा कि हज़रत सैयदना शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां अल्लाह को चाहने वाले, अल्लाह की याद में अपनी जिंदगी गुजारने वाले, अल्लाह की रज़ा के काम करने वाले, अल्लाह की नाराजगी के कामों से दूर रहने वाले, इल्मो-अमल, तकवा परहेजगारी की एक मिसाल थे। शैख़ अल्लाह की अता से अपनी बारगाहों में आने वालों को सुनते देखते और पहचानते हैं और उनकी मदद भी फरमाते हैं। आपको अल्लाह ने बहुत रूहानी ताकत अता फ़रमाई है। आपकी दरगाह पर नूर बरसता है। आप लोगों के दिलों पर राज करते हैं।

नार्मल स्थित जामा मस्जिद हज़रत मुबारक खां शहीद में रविवार को महफिल-ए-गौसुलवरा के 6वें दिन कारी अफजल बरकाती कहा कि हजरत शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी की करामात बचपन से ही दुनिया वालों ने देखी। जब आप छोटे ही थे तो इल्म हासिल करने के लिए मां ने 40 दीनार देकर काफिला के साथ बगदाद रवाना किया। रास्ते में 60 डाकुओं ने काफिला रोक कर लूटपाट मचाया। डाकुओं ने किसी को भी नहीं छोड़ा और सभी का माल व पैसे लूट लिए। शैख़ अब्दुल कादिर को नन्हा जान कर किसी ने नहीं छेड़ा। चलते-चलते डाकुओं के सरदार ने यूं ही पूछ लिया कि तुम्हारे पास क्या है। शैख़ अब्दुल कादिर ने पूरी ईमानदारी से कहा मेरे पास 40 दीनार है। तलाशी ली गई तो 40 दीनार निकले। डाकुओं ने जानना चाहा कि आप ने ऐसा क्यों किया।शैख़ अब्दुल कादिर ने फरमाया सफ़र में निकलते वक्त मेरी मां ने कहा था हमेशा हर हाल में सच ही बोलना, इसलिए मैं दीनार गंवाना मंजूर करता हूं लेकिन मां की बातों के विरुद्ध जाना पसंद नहीं करता। शैख़ अब्दुल कादिर की बातों का इतना असर हुआ कि सरदार समेत सभी डाकुओं ने गुनाहों से तौबा की और नेक इंसान बन गये।

अंत में सलातो सलाम पढ़कर खैर व बरकत की दुआ मांगी गई। जलसे में हाफिज मो. अज़ीम अहमद नूरी, मौलाना तफज़्ज़ुल हुसैन रज़वी, एजाज अहमद, आरिफ रज़ा, जलालुद्दीन अहमद, बरकत हुसैन, इम्तियाज अहमद, मोहर्रम अली, पप्पू आदि मौजूद रहे।