-‘महफिल-ए-गौसुलवरा’ का तीसरा दिन

गोरखपुर। नार्मल स्थित जामा मस्जिद हज़रत मुबारक खां शहीद में गुरुवार को ‘महफिल-ए-गौसुलवरा’ के तीसरे दिन कारी बदरे आलम निज़ामी व कारी अफ़ज़ल बरकाती ने हज़रत शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां को शिद्दत से याद करते हुए कहा कि ‘अम्बिया-ए-किराम’ और ‘औलिया-ए-किराम’ का मकसद यही था कि इंसान, अल्लाह वाले महबूब बंदों जैसी जिदंगी गुजारने का कानून पा जाएं। मोहब्बत, उल्फत और आपस में भाईचारगी का माहौल बाकी रखकर एक खुदा की इबादत कर उसका करीबी बन जाए, ताकि इबादतों की वजह से दुनिया भी कामयाब हो जाए और आखिरत भी।

यूट्यूब लाइव के नूरी नेटवर्क पर ऑनलाइन महफिल में मौलाना मो. कैसर रज़ा, मौलाना निजामुद्दीन, हाफिज शहादत हुसैन ने कहा कि शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी का जन्म जीलान में हुआ था। आप ने कादरिया सूफी परंपरा की शुरूआत की। आपके वालिद का नाम हज़रत अबू सालेह मूसा व वालिदा का नाम हज़रत उम्मुल खैर फातिमा था। अापने दीन-ए-इस्लाम के पैगाम को दूर तक फैलाया। आप परहेजगार, इबादतगुजार, पाकीजा व अल्लाह वालों के इमाम हैं। आपके फरमान पर आम इंसान ही नहीं बल्कि सभी वली भी अमल करते हैं।