उर्स-ए-पाक का दूसरा दिन

गोरखपुर। रहमतनगर में बहादुरिया जामा मस्जिद के पास मौजूद आस्ताने पर हज़रत मोहम्मद अली बहादुर शाह अलैहिर्रहमां के 104वें तीन रोजा उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन भोर में मजार शरीफ का गुस्ल व गुलपोशी की गई। इसके बाद कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी हुई। एशा की नमाज के बाद सरकारी चादर आस्ताने पर पेश की गई।

इस मौके पर मौलाना अली अहमद ने कहा कि कुरआन-ए-पाक एक ऐसी किताब है जो बताती है कि हमें कैसे जिंदगी गुजारनी है। हर बात का जिक्र कुरआन-ए-पाक में है। इल्म की शम्मा से हमको मोहब्बत होनी चाहिए। हमें ग़रीबों की सहायता करनी चाहिए। दर्द-मंदों व बुजुर्गों से मोहब्बत करनी चाहिए। हमें हर वक्त अल्लाह से दुआ मांगनी चाहिए कि हम हर तरह की बुराई से बचें रहें और नेकी की राह पर चलें। दीन-ए-इस्लाम औरतों को सम्मान के नजरिए से देखता है। परिवार में मर्दों की तरह औरतों को समान अधिकार प्राप्त है। हम दीन-ए-इस्लाम का अध्ययन करें तो पता चलता है कि दीन-ए-इस्लाम ने औरतों को चौदह सौ साल पहले वह स्थान दिया है जो आज के कानून दां भी उसे नहीं दे पाए। दीन-ए-इस्लाम लोकतांत्रिक धर्म है और इसमें औरतों को बराबरी के जितने अधिकार दिए गए हैं उतने किसी भी धर्म में नहीं हैं। दीन-ए-इस्लाम ने औरत को उसका पूरा जायज़ अधिकार और न्याय दिया। शरीयत पर अमल करके ही दीनी व दुनियावी कामयाबी हासिल की जा सकती है।

अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो-अमान की दुआ मांगी गई। शुक्रवार को आस्ताने पर फातिहा ख्वानी, दुआ ख्वानी व कुल शरीफ की रस्म अदा कर लंगर बांटा जायेगा। उर्स में अली मज़हर शाह, अली अख्तर शाह, अली गज़नफर शाह, फिरोज अहमद, मो. कासिम, मो. आसिफ, मो. अनस, मो. शहजादे, मो. वसीम अहमद, नईम अहमद, शम्स तबरेज, अली यावर, अली अंसार, तौसीफ अहमद, जफ़र शाह, मुजफ्फर शाह, राजू कुरैशी, बब्लू कुरैशी आदि मौजूद रहे।