-‘महफिल-ए-गौसुलवरा’ का दूसरा दिन

गोरखपुर। हज़रत सैयदना शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां की याद में तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की ओर से नार्मल स्थित जामा मस्जिद हज़रत मुबारक खां शहीद में बुधवार को ‘महफिल-ए-गौसुलवरा’ के दूसरे दिन कारी अफ़ज़ल बरकाती ने कहा कि युवाओं को सूफ़ियों के संदेशों को समझना चाहिए और आत्मसात करना चाहिए। महान सूफ़ियों में हज़रत सैयदना शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी का नुमाया नाम है। आपका लकब मोहिउद्दीन है, जिसका अर्थ दीन को जिंदा करने वाला है। आप दीन-ए-इस्लाम का प्रचार करने के लिए बगदाद गए। आपने बगदाद में लोगों को दीन-ए-इस्लाम की बातें बतायीं और चालीस सालों तक लगातार बहुत मजबूती से नेकी व दीन की बातों को फैलाते रहे।

कारी बदरे आलम निज़ामी ने कहा कि हज़रत शैख़ अब्दुल कादिर का बयान सुनने के लिए इंसानों के साथ जिन्नात भी आया करते थे। आपके पास बेशुमार इल्म था। जिसका फायदा दुनिया को मिला और दीन-ए-इस्लाम नये सिरे से जिंदा हुआ। शैख़ अब्दुल कादिर की पैदाइश रमज़ान महीने में हुई थी। जन्म के समय ही आप सेहरी से इफ्तार तक मां का दूध नहीं पीते। जिस तरह रोजेदार रोजा रखता है, उसी तरह आप मां का दूध केवल सेहरी व इफ्तार के वक्त पीते थे। आप जब दस साल के हुए और मदरसे में पढ़ाई करने जाया करते थे तो फरिश्ते आते और आपके लिए मदरसे में बैठने की जगह बनाते थे। फरिश्ते दूसरे बच्चों से कहते थे अल्लाह के वली के लिए बैठने की जगह दो। आप दीन-ए-इस्लाम के महान प्रचारक थे।