तीन दिवसीय उर्स-ए-मुबारक का आगाज़

गोरखपुर। रहमतनगर स्थित बहादुरिया जामा मस्जिद के पास हज़रत मोहम्मद अली बहादुर शाह अलैहिर्रहमां का 104वां तीन दिवसीय उर्स-ए-मुबारक बुधवार को दरगाह पर ‘जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी’ के साथ शुरु हुआ।

मुख्य वक्ता मौलाना अली अहमद शाद बस्तवी ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने आज से चौदह सौ साल पहले स्पष्ट फरमा दिया कि मां-बाप की तरफ से औलाद को सबसे अफ़ज़ल तोहफा उनकी अच्छी तालीम और तरबियत है। यही उनके लिए दीन और दुनिया दोनों एतबार से अच्छी नेमत है। बाकी सारी चीजें फानी और सानवी दर्जा रखती है इसलिए अपनी औलाद को पढ़ाइए और मेहनत करके पढ़ाइए। एक वक्त भूखे रहकर पढ़ाना पढ़े तो भूखे रहकर पढ़ाइए ताकि अल्लाह के पास जवाबदेही आसान हो। दिल को अल्लाह के जिक्र से खाली न रखें। हम मुसलमान हैं। हमारा धर्म इस्लाम है, यह हमारे लिए बड़े गर्व की बात है। दौलत से दिल में अंधेरा होता है और इल्म से दिल को रौशनी मिलती है। इल्म से दूरी या इल्म वालों से बुग्ज और पढ़ने लिखने से दूरी इंसान को हलाकत तक पहुंचा देती है। इस्लामी तहज़ीब में वही सच्चा मुसलमान है जो कुरआन पाक सीखे और सिखाए जिससे अल्लाह की मारफत हासिल हो। इल्म पैगंबरों की मीरास और माल कुफ़्फ़ार, फिरऔन और कारून की मीरास है। सबसे अफ़ज़ल इल्म कुरआन, हदीस और दीन का इल्म है। इसके बगैर कोई मुसलमान हकीकी मुसलमान नहीं बन सकता। माडर्न तालीम हासिल करने से पहले अपने बच्चों को कुरआन पढ़ना सिखाएं, दीन की जरूरी और अहम बातें सिखाएं।

जलसे का आगाज तिलावत-ए-कुरआन से कारी मो. मोहसिन बरकाती ने किया। कारी नसीमुल्लाह, अहमद रज़ा व हाफिज यासीन ने नात पढ़ी। समाप्ति पर सलातो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गई। शीरीनी तकसीम की गई। गुरुवार को मजार पर कुरआन ख्वानी व गुलपोशी होगी और सरकारी चादर पेश की जायेगी।

जलसे में अली मज़हर शाह, अली अख्तर शाह, अली गज़नफर शाह, फिरोज अहमद नेहाली, मो. कासिम, मो. आसिफ, मो. अनस, मो. शहजादे, मो. वसीम अहमद, नईम अहमद, शम्स तबरेज, अली यावर, अली अंसार, तौसीफ अहमद, जफ़र शाह, मुजफ्फर शाह, राजू कुरैशी, बब्लू कुरैशी, शौकत अली, मो. आज़ाद, जहीर शेख़, इफ्तेखार अहमद आदि मौजूद रहे।