रसूलपुर में जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी

गोरखपुर। मंगलवार को अंसार नौजवान सीरत कमेटी की ओर से जामा मस्जिद रसूलपुर के पास जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी हुआ।

मुख्य अतिथि संतकबीरनगर के प्रसिद्ध विद्वान मुफ्ती अख्तर हुसैन अलीमी ने कहा कि जब पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने मस्जिद-ए-नबवी की तामीर की तो उसके साथ तालीम के लिए चबूतरा तामीर फरमाया। जिस पर बैठकर सहाबा इल्मे दीन सीखते थे और जिंदगी गुजारने के लिए आपसे तहजीब और तमद्दुन की बात मालूम करते थे, हालांकि मस्जिद-ए-नबवी की तामीर का दौर आप और आपके सहाबा पर आर्थिक तंगी का जमाना था, पेट पर पत्थर बांधे हुए होते थे फिर भी उस वक्त मस्जिद और चबूतरा बनाते अल्लाह के पैगंबर ने मुसलमानों को यह तालीम दे दी है कि मुसलमान भूखा प्यासा रह सकता है मगर जैसे नमाज़ से दूर नहीं हो सकता उसी तरह इल्म हासिल करने से भी दूर नहीं रह सकता, जैसे नमाज़ फर्ज है उसी तरह इल्म हासिल करना भी फर्ज है।

विशिष्ट अतिथि मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम इल्म का मजहब है लिहाजा बच्चों को शिक्षा जरूर दिलाएं। दीन-ए-इस्लाम शिक्षा का अलमबरदार है वो चाहता कि समाज में शिक्षा आम हो और जहालत खत्म हो। शिक्षा न होने की वजह से समाज में बुराई पैदा होती है। इल्म से गफलत कौमों को बर्बाद कर देती है।

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो शांति की दुआ मांगी गई। संचालन मो. अनस ने किया। जलसे में मौलाना नूरुज्जमा मिस्बाही, मौलाना मो. शादाब, मुफ्ती खुश मोहम्मद, मौलाना रजीउल्लाह, मो. दारैन, तामीर अहमद, इरशाद अहमद आदि मौजूद रहे।