बसंतपुर व बेनीगंज में मिलादे मुस्तफा कांफ्रेंस

गोरखपुर। शहर के मोहल्ला बसंतपुर में मिलादे मुस्तफा कांफ्रेंस हुई। मुख्य अतिथि शाही मस्जिद बसंतपुर सराय के इमाम मुफ्ती मो. शमीम अमज़दी ने कहा हमारे समाज में उसी वक्त अमन हो सकता है, जब हम अच्छे और नेक बनेंगे। समाज को मजबूत करने के लिए आपस में भाईचारे व मोहब्बत कायम करना होगा। पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम तौहीद, धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक, सौहार्द के संदेशवाहक हैं। आप इंसानियत के तरफदार और परस्पर प्यार के पैरोकार थे, इसलिए आपने मोहब्बत का पैगाम दिया। आप रहमतुल्लिल आलमीन हैं। आपका पवित्र चरित्र गुण दरअसल सहिष्णुता की सरिता है जिसमें सौहार्द का सतत प्रवाह है। आपका व्यक्तित्व सत्य और सद्भावना का संस्कार है तो कृतित्व इस संस्कार के व्यवहार की विमलता का विस्तार। आप शांति और चैन के हिमायती थे और मानते थे कि समाज की खुशहाली की इमारत तौहीद व बंधुत्व की बुनियाद पर ही निर्मित हो सकती है।

अध्यक्षता करते हुए नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि कुरआन-ए-पाक में अल्लाह का फरमान है कि अल्लाह फसाद करने वालों से मोहब्बत नहीं करता। अल्लाह एहसान करने वालों यानी सौहार्द बढ़ाने वालों से मोहब्बत करता है।

शीश महल पोखरा बेनीगंज के पास मिलादे मुस्तफा कांफ्रेंस में कारी अफज़ल बरकाती व कारी मो. शाबान बरकाती ने अवाम से कहा कि मां-बाप को कभी नाखुश न करो इसलिए कि उनके कदमों के नीचे जन्नत है। मां-बाप की खिदमत करने से दीन व दुनिया दोनों में इज्जत मिलती है। जिसने मां-बाप को राजी कर लिया उसने अल्लाह को राजी कर लिया। उस्ताद का अदब मां-बाप से ज्यादा हक रखता है जो लोग नहीं करते वह बहुत बदबख्त हैं। रोजा, नमाज़, हज, जकात वक्त से अदा करें। अल्लाह के हक के साथ बंदों का हक भी अदा करें।इल्म हासिल करें। मस्जिदों व मदरसों को आबाद करें। मदरसों पर इल्ज़ाम लगाने वाले झूठे, मक्कार व फरेबी हैं। जानवरों पर भी रहम करें।

अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो तरक्की की दुआ मांगी गई। जलसे में सैयद जफ़र अहमद, महबूब आलम, कारी मो. मोहसिन बरकाती, अब्दुल माबूद, सरफराज, तौफीक खान, फैज़ान तौफीक, मुदीर, सड्डू, सैयद अमानुल्लाह, सज़्ज़ाद, अरमान अहमद, अब्दुर्रहीम, दाउद आदि मौजूद रहे।