जश्न-ए-आमदे रसूल जलसा

गोरखपुर। मौला अली कमेटी की ओर से नई कॉलोनी चिलमापुर में जश्न-ए-आमदे रसूल जलसा हुआ।

मुख्य अतिथि बरेली शरीफ के मौलाना सैयद क़मरुल हसन ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के इश्क में तड़पने वाला दिल ही मोमिन का दिल होता है। अपने दिल को पैगंबर-ए-आज़म के इश्क का मदीना बना लें। हक बोलें, हक कहें, हक के तरफदार बनें। पैगंबर-ए-आज़म के वफादर बनें। नाम के ही नहीं अमल व किरदार से भी मुसलमान बनें। जब कोई देखें तो कहने पर मजबूर हो जाये कि वह देखो पैगंबर-ए-आज़म का शैदाई जा रहा है। सब्र और नमाज़ के जरिए मदद तलब करें। बुराई से दूरी अख्तियार करें। बुरों की सोहबत से बचें।

उन्होंने कहा कि बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर के साथ दीनदार बनाएं। बच्चा अगर दीनदार होगा तो वह जिस भी क्षेत्र में जायेगा दीन-ए-इस्लाम उसकी रहनुमाई करता नजर आयेगा। औलाद का अधिकार है कि उनकी अच्छी तालीम व तरबियत का इंतजाम किया जाए। समाज सुधार की बात करने वाले पहले स्वयं के अंदर सुधार लाएं। उलेमा और मदरसों का समाज सुधार में अहम रोल है। वह अच्छाई का हुक्म देते हैं, बुराई से रोकते हैं। समाज सुधार की शुरूआत हमें सबसे पहले स्वयं के घर से करनी होगी।

विशिष्ट अतिथि मौलाना सैयद सलमान हसन ने कहा कि नमाज़ जैसी अज़ीम नेमत को देखकर लोग कहने पर मजबूर हो गए कि दुनिया में सबसे बेहतरीन निज़ाम इस्लामी निज़ाम है। जब मस्जिद से अज़ान की सदा आती है तो मुसलमान मस्जिदों का रुख करते हैं। एक इमाम होता है उसके पीछे एक सफ में काला, गोरा, अमीर-गरीब, अफसर-मजदूर सब कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं। समाज में समानता व भाईचारा का इससे बेहतर उदाहरण रहती दुनिया तक पेश नहीं किया जा सकता है। नमाज़ कायम करें। मुसलमानों संभल जाओ दीन-ए-इस्लाम का दामन मजबूती से थाम लो, दुनिया में भी कामयाबी मिलेगी और आखिरत में भी। सबसे अफ़ज़ल कुरआन, हदीस और दीन का इल्म है। इसके बगैर कोई मुसलमान हकीकी मुसलमान नहीं बन सकता है। दीन-ए-इस्लाम कल भी हक था, आज भी हक है और कल कयामत तक हक ही रहेगा। माडर्न तालीम हासिल कराने से पहले अपने बच्चों को कुरआन पढ़ना सिखाएं, दीन की जरूरी और अहम बातें सिखाएं, रहन-सहन के आदाब, बड़ों के साथ अदब व एहतराम का सुलूक, छोटों से प्यार से पेश आना, जरूरी तहजीब और तरबियत देना जरूरी है।

संचालन मौलाना जर्रार बारी ने किया। हाफिज़ शहादत हुसैन, हाफिज़ निज़ामी व मो. फहीम ने नात शरीफ पढ़ी। समाप्ति पर सलातो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गई। शीरीनी तकसीम की गई।

जलसे में फरूख़ जमाल, मो. साजिद, मो. अखलाक , मो. असलम, मो. सलीम, मो. टीपू , मो. गुफरान, रियाज़, परवेज़, हामिद, मौलाना मसरूफ , मौलाना बरकतुल्ला, शकील अहमद, अनवर खान, सैयद शमशाद अहमद, अबरार अहमद आदि मौजूद रहे।